पिछले सप्ताह बॉलीवुड से जुड़ी हुई एक और किताब प्रकाशित होने के बाद बाज़ार में उपलब्ध हो गई है। यह किताब बॉम्बे सिनेमा को इस्लामियत से जोड़ती है और यह बताती है की भारतीय फिल्मों में किस तरह से मुस्लिम समाज और उसके रीति-रिवाजों एवं सभ्यताओं को समय-समय पर मुख्य विषय के रूप में चुना गया और फिल्मे सफल हुई। उदाहरण के तौर पर "चौदवी का चाँद, मुग़ल-ऐ-आजम, गर्म हवा , नजमा, उमराव जान, जोधा अकबर इत्यादि पर किताब में विस्तृत चर्चा की गई है। यह किताब फ़िल्म विषयक जानकारी रखने वालों के लिए संग्रहणीय है।
हेबिटेट सेंटर में आयोजित चर्चा के दौरान लेखक द्वय रिचर्ड एलन (चेयर, फ़िल्म स्टडीज, न्यूयार्क यूनिवर्सिटी) और इरा भास्कर ( प्रोफेसर , स्कूल ऑफ़ एस्थेटिक्स, जेएनयू ) किताब के मुख्य पहलुओं पर अपने विचार रखे।
रिचर्ड एलन ने बताया कि किताब लिखने का विचार उन्हें अबुधाबी फ़िल्म फेस्टिवल के दौरान आया और वहीं उनकी मुलाकात इरा जी से हुई और उन्होंने इस विषय पर किताब लिखने का फ़ैसला किया।
किताब : Islamicate Culture ऑफ़ बॉम्बे सिनेमा ।
लेखक : रिचर्ड एलन, इरा भास्कर।
Price : ९५०/-

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